29 फ़रवरी 2016

किस्मत

कुछ ऐसे हालात बने कि मेरा ब्लॉग मुझे पुकारता रहा और मैं उसकी पुकार सुनकर भी उस तक ना आ सकी किस्मत ने कुछ ऐसा पटका दिया कि अब तक नहीं सँभल पाई दुःख तो बहुत है पर जहाँ अपनी नहीं चलती वहाँ क्या किया जाए-

रूठ जाती है किस्मत कभी 
तो कभी साथी छोड़ देता है साथ
 खिलाए थे जो रंग-बिरंगे फूल संग-संग हमने
खो जाती है उनकी खुशबू कहीं
और हम मन को मजबूती से पकड़े
समेटने की नाकामयाब कोशिश 
करते रह जाते हैं आखिरी साँस के साथ...

2016 में "हम लोग" पत्रिका में पेज न० 61पर मेरे कुछ माहिया प्रकाशित हुए हैं लिंक है-

file:///C:/Users/Bhawna/Downloads/humlog%202016%20final%20new.pdf

Bhawna