5 जुलाई 2007

कैसे मुस्काया अमलतास...



1
झुलसा तन
देख अमलतास
खिला था मन।


2
दुख सदृश
सहे भीषण गर्मी
अमलतास।

3
वर्षा ‍ऋतु में
फूटे अंकुर, खिला
अमलतास।

4
आया यौवन
अमलतास वृक्ष
लगा झूमने।

5
बिछा कालीन
बुनकर जो बने
अमलतास।

6
नवयौवना
बनाये उबटन
पीत पुष्प से।

7
पीली चूनर
पहन इतराये
अमलतास।

8
रिझाने लगा
सोने के गहनों से
अमलतास।

9
उछले खूब
पंछियों के समूह
खिले जो फूल।

10
छनकी धूप
अमलतास तले
स्वर्ण समान।

11
घिरे हुये हैं
अमलतास वृक्ष
पंछी दल से।

12
था प्रातःकाल
अलसाया ही रहा
अमलतास।

13
चहकी धूप
हंसे अमलतास
बच्चों समान।

6 टिप्‍पणियां:

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

अच्छे लिखे हैं
आपने ये हायकू
और भी लिखें

Udan Tashtari ने कहा…

बड़े ही सुन्दर अमलतासी हाईकु हैं, बधाई.

हरिराम ने कहा…

अमलतास की कविता में स्तुति में लिखे ये हाईकु 'अमलतास' की तरह ही सुन्दर हैं और 'गर्मियों में भी फूलने-फलने' का सन्देश देते हैं।

यदि आप सेटिंग्स में से word verification हटा दें तो अच्छा रहे।

Dr.Bhawna ने कहा…

राकेश जी बहुत-बहुत शुक्रिया।

Dr.Bhawna ने कहा…

समीर जी धन्यवाद।

Dr.Bhawna ने कहा…

हरिराम जी प्रोत्साहन के लिये बहुत-बहुत शुक्रिया।

मैं सेटिंग बदलती हूँ हरिराम जी शुक्रिया।