20 जुलाई 2007

तभी तुम्हें लिक्खी है पाती


अब ये दुनिया नहीं है भाती
तभी तुम्हें लिक्खी है पाती।

खून-खराबा है गलियों में,
छिपे हुए हैं बम कलियों में,
है फटती धरती की छाती,
तभी तुम्हें लिक्खी है पाती।

उज़ड़ गये हैं घर व आँगन,
छूट गये अपनों के दामन,
यही देख के मैं घबराती,
तभी तुम्हें लिक्खी है पाती।

है बड़ी बेचैनी मन में,
नफ़रत फैली है जन-जन में,
नींद भी अब तो नहीं है आती,
तभी तुम्हें लिक्खी है पाती।



डॉ० भावना

11 टिप्‍पणियां:

शब्द-सृष्टी ने कहा…

मन में ही सुख सारे बैठे
कहीं नहीं समाधान मिल पाता
भेजो चाहे बात भली सी
चिठ्ठी सारी लौट ही आती

Dard Hindustani ने कहा…

बहुत बढिया रचना। ऐसे ही लिखते रहे।

Lavanyam -Antarman ने कहा…

बहुत अच्छी पाती लिख डाली भावना जी --
मेरी भी कुछ ऐसी ही इच्छा हो रही है !
लिखती रहेँ
स स्नेह,
-- लावण्या

sunita (shanoo) ने कहा…

एसा लगता है जैसे इश्वर को पाति लिखी गई है बहुत ही सच्चे दिल से लिकली हुई भावनायें है,...
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ती है भावना जी,...बधाई!

सुनीता(शानू)

mamta ने कहा…

आज दुनिया मे जो कुछ भी हो रहा है आपकी ये पाती वही दर्शाती है। बहुत अच्छा।

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर भावों से ओत-ओत रचना है।बधाई।

उज़ड़ गये हैं घर व आँगन,
छूट गये अपनों के दामन,
यही देख के मैं घबराती,
तभी तुम्हें लिक्खी है पाती।

Udan Tashtari ने कहा…

आज के हालातों को दर्शाती एक गंभीर रचना के लिये बधाई. बहुत सुंदर.

रवीन्द्र रंजन ने कहा…

जब हम स्कूल-कॉलेज में पढ़ रहे थे तो हमारे बहुत से पत्र-मित्र हुआ करते थे। हम उन्हें लंबी-लंबी पाती लिखा करते थे। अब तो वह परंपरा ही खत्म हो गई है। संचार क्रांति के इस युग में लोगों की लिखने की आदत ही छूटती जा रही है। इसलिये आज जब आपने पाती लिखने की बात कही तो बहुत सी पुरानी यादें ताजा हो गईं। बहुत अच्छा लगा।

Divine India ने कहा…

गंभीर विषयों पर तीक्ष्ण पाती…।

narendra purohit ने कहा…

Aadarniya dr bhawna ji,

namaskar. abhi khuch der pehle mene aapke blog par aapki nai rachna padhi, kafi sunder lagi. ek aam admi jo ki khun kharbe, dango ke bhich raheta, uske maan me aisi he soch hoti hei, jisko ki aapne apne sabdo me dhal diya hei. aap vastav me ek bahut he badhiya rachna kar hei, jo ke maan ke bhawnawo ko apne sabdo rupi motiyo ki mala me piro dete hei.

ek baar phir se aapko badhiya

--
narendra purohit

Dr.Bhawna ने कहा…

सभी पाठकों का बहुत-बहुत धन्यवाद.देरी से लिखने के लिये माफी चाहती हूँ।