5 दिसंबर 2013

अविराम में मेरी कुछ क्षणिकाएँ



















Bhawna

3 टिप्‍पणियां:

सहज साहित्य ने कहा…

सभी क्षणिकाएँ एक से बढ़कर एक हैं, बूँद में समुद्र की तरह । हार्दिक बधाई !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

लाजवाब ... एक से बढ़ कर एक ...

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन सभी...बधाई!!