3 जून 2017

1-ज़रा रोशनी मैं लाऊँ 

छाया घना अँधेरा
ज़रा रोशनी मैं लाऊँ 
ये सोचकर कलम को
मैंने उठा लिया है...
घूमें गली-गली में 
नर-वहशी और दरिंदे
तड़पें शिकार होकर
घायल पड़े परिंदे
उनके कटे परों पर
मरहम लगा दिया है।
ये सोचकर कलम को
मैने उठा लिया है...
सजदे में झुकते सर भी
रहते कहाँ सलामत
पूजा के स्थलों में 
आ जाये कब क़यामत 
नफरत पे प्रेम का रंग
थोड़ा चढ़ा दिया है।
ये सोचकर कलम को
मैने उठा लिया है...                       
ढूँढें डगर कहाँ जब
क़ानून ही है अंधा
मर्ज़ी से इसको बदलें
नेताओं का है धंधा
आँखों में आस का अब
दीपक जला दिया है।
ये सोचकर कलम को
मैने उठा लिया है... 
"अंतर्राष्ट्रीय हिंदी कविता प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त"
Bhawna

21 टिप्‍पणियां:

Vibha Rashmi ने कहा…

ज़रा रोशनी मैं लाऊँ , सुन्दर कविता । प्रतियोगिता में स्थान पाने के लिये बधाई लें ।

Vibha Rashmi ने कहा…

ज़रा रोशनी मैं लाऊँ , सुन्दर कविता । प्रतियोगिता में स्थान पाने के लिये बधाई लें ।

anita manda ने कहा…

अच्छी कविता, बधाई प्रतियोगिता में स्थान पाने के लिए।

RAMESHWAR KAMBOJ HIMANSHU ने कहा…

मै वर्ष 2006 से आपका ब्लॉग पढ़ता आ रहा हूँ0 अपरिहार्य कारणों से दिल के दरमियाँ स्थगित रहा। आज आपको फिर से सक्रिय हुआ देखकर मन खुश हुआ। 'छाया घना अँधेरा ज़रा रोशनी मैं लाऊँ ' का सकारात्मक सन्देश प्रेरणा देने वाला है। हार्दिक बधाई > भविष्य में भी आपकी रचनाएँ यहाँ नियमित रूप से आती रहेंगी, यही आशा है। रामेश्वर काम्बोज

Shashi Padha ने कहा…

बहुत बहुत बधाई भावना | सुंदर कविता है इसीलिए स्थान भी पाया |

सस्नेह,
शशि पाधा

Rekha ने कहा…

सुन्दर सार्थक सामयिक कविता के लिए एवं प्रतियोगिता में स्थान प्रियति के लिए बधाई !!

Dr Purnima Rai ने कहा…

खूबसूरत अभिव्यक्ति..बधाई

Sudershan Ratnakar ने कहा…

भावनाजी,समसामयिक प्रेरणादायी पुरस्कृत कविता के लिए हार्दिक बधाई।

Pushpa Mehra ने कहा…


सुंदर कविता तथा प्रतियोगिता में स्थान प्राप्ति हेतु हार्दिक बधाई |

पुष्पा मेहरा

ज्योति-कलश ने कहा…

बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना ...हार्दिक बधाई भावना जी 💐💐

Dr.Bhawna ने कहा…

Aap sabhi ka sneh pakar bahut achha laga aap sabhi ka antarman se bahutbahut aabhar.. kamboj ji aapki duayen bahut falti hain ,koshish rahegi ki ye blog ab jarur aage badhe aapka bahut bahut aabhar...

Shivji Srivastava ने कहा…

बहुत सुंदर प्रेरक कविता,कवि धर्म यही है 'तमसो मा ज्योतिर्गमय'सामयिक एवम् सार्थक कविता।बधाई।

ritu kaushik ने कहा…

बहुत सुंदर कविता ।बधाई।

Amit Agarwal ने कहा…

arthgarbhit, saamyik rachna.. bahut sundar!
pratiyogita mein sthan paane ke liye badhaai:)

sunita kamboj ने कहा…

भावनजी हार्दिक बधाई बहुत उम्दा रचना ।

sunita kamboj ने कहा…

भावना जी हार्दिक बधाई । बहुत भावपूर्ण रचना ।

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

आपकी रचनाएँ तो हमेशा हमको बहुत अच्छी लगती है...। बहुत सुंदर सृजन, मेरी बधाई और शुभकामनाएँ

Krishna ने कहा…

बहुत सुंदर रचना भावना जी हार्दिक बधाई।

Krishna ने कहा…

बहुत सुंदर रचना भावना जी हार्दिक बधाई।

Dr.Bhawna ने कहा…

aap sabhi ka sneh is rachna ko mila dil gadgad ho gaya aapka tahe dil se aabhar.

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बधाई