मुझे साहित्य से बहुत प्यार है। साहित्य की वादियों में ही भटकते रहने को मन करता है। ज्यादा जानती नहीं हूँ पर मेरे अन्तःकरण में बहुत सी ऐसी बातें हैं जो कभी तो आत्ममंथन करती हैं और कभी शब्दों में ढलकर रचनाओं का रूप ले लेती हैं। वही सब आपके साथ बाँटना चाहूँगी।
4 comments:
गुलमोहर पर लिखा अंतिम हाइकू लाजवाब है.
सभी हाइकू यथार्थता से परिपूर्ण हैं ।
बहुत बढ़ियां, भावना जी. बधाई.
संजय जी, प्रभाकर जी, समीर जी दाद देने के लिये बहुत-बहुत शुक्रिया। अपना स्नेह ऐसे ही बनाये रखिये।
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