16 अप्रैल 2007

कविता कोश द्वारा सम्मानित

चित्रनामसम्मान चक्रटिप्पणी
डा. भावना कुँअर
कामायनी के हिन्दी यूनिकोड में टंकण के लिये
डा. भावना कुँअर को जयशंकर प्रसाद कृत कामायनी रचना को हिन्दी यूनिकोड में टंकित कर कविता कोश में जोडने के लिये कोश द्वारा ग्रंथ सम्मान चक्र से सम्मानित किया जाता है।

३१ मार्च २००७





















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14 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बहुत बधाई!!

Neeraj Rohilla ने कहा…

डा. भावनाजी,
आपका प्रयास नि:सन्देह प्रशंसनीय है । हमारी आशा है आप आगे भी अन्तर्जाल पर हिन्दी के प्रचार प्रसार में प्रमुख भूमिका निभाती रहेगीं ।

आपको पुरस्कार के लिये हार्दिक बधाईयाँ ।

साभार,

mahashakti ने कहा…

बधाई

अनूप शुक्ला ने कहा…

बधाई! बहुत-बहुत बधाई!

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

भावना जी

बहुत बहुत बधायी आप को...

Shuaib ने कहा…

आपको 'ग्रंथ सम्मान चक्र' मुबारक हो।
वैसे एक कविता लिखने के लिए आपको कई दिन लगते होंगे ;)

प्रियंकर ने कहा…

बधाई! बहुत-बहुत बधाई!

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

स्वीकारें अभिनन्दन, यह श्रंगार हुआ हिन्दी भाषा का
एक अमर कॄति, आप माध्यम बनी, जाल पर आई सँवर कर
सहज आज उपलब्ध, विश्व के कोने कोने में यह रचना
नमन करेगा हर इक पाठक कालजयी यह कॄति पढ़ पढ़ कर

Dr.Bhawna ने कहा…

समीर जी, महाशक्ति जी, अनूप जी, मोहिन्दर जी, प्रियंकर जी, बहुत-बहुत शुक्रिया।

Dr.Bhawna ने कहा…

शुएब जी आपका कथन सही है कई दिन तो लगते हैं पर मैंने काम को जल्दी अंजाम देने के लिये कभी-कभी एक ही दिन में कई-कई रचनायें देवनागरी में लिखी हैं जिससे पता ही नहीं चला कि लिखते-लिखते कब शाम हो गयी। प्रोत्साहन तो आप सबसे ही मिला मुझे। बहुत-बहुत धन्यवाद।

Dr.Bhawna ने कहा…

राकेश जी जहाँ आपकी बधाई न मिले वहाँ हमेशा ही अधूरा पन लगता है आपका शुक्रिया जो आपने सराहा। जयशंकर प्रसाद जी की रचनाओं ने मुझे हमेशा ही प्रभावित किया है।

Hindi Blogger ने कहा…

भावना जी, बहुत-बहुत बधाई!

lalit ने कहा…

भावना जी और ललित जी दोनो को इस महान ग्रन्थ को अन्तर्जाल पर विराजित कराने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद।

अनुनाद

E-mail : anunad@gmail.com
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आपके प्रोत्साहन के लिये बहुत धन्यवाद अनुनाद जी। प्रोत्साहन की हमेशा आवश्यकता रहती है। वैसे कामायनी के हिन्दी यूनिकोड में टंकण का पूरा श्रेय भावना जी को ही है -मेरा इस कार्य में योगदान कुछ भी नहीं। और जैसा कि आपने कविता कोश में लिखा कि इस रचना के टंकण में वर्तनी की त्रुटियाँ नहीं हैं -तो इसका श्रेय भी भावना जी को ही है -उन्होनें बडे ध्यान और लगन से इस रचना को टंकित किया है। अब संतोष यह है कि लोग इस ग्रंथ को विश्व में कहीं भी बिना किसी समस्या के पढ़ पाएँगे। भावना जी और आप जैसे लोगो के सहयोग से ही बडे कार्य सफल होते हैं।

आपकी बधाई भावना जी तक पँहुचाने के लिये यह ईमेल मैं उन्हें भी कॉपी कर रहा हूँ।

शुभकामनाओं सहित

ललित

narendra ने कहा…

aadarniya bhawna ji,
Namaskar. today i saw your blog and i become very happy to see a NEWS that you have got GRANTH SAMMAN CHAKRA for kamayani in unicode. Bhawana ji, this chakra is saying itself your success story.
I prey to god for your continously success and growth in your life.
best wishes from my family