26 अप्रैल 2008

आईये थोड़ा सा लुत्फ आप भी उठा लीजिये

24 अप्रैल का पूरा दिन बहुत व्यस्त गया जाता भी क्यों नहीं मेरी छोटी बेटी के स्कूल में " कला प्रदर्शनी " जो थी। वहाँ बच्चों का हुनर देखते ही बनता था कहीं पर कला की बात हो और हम ना जायें ऐसा तो हो नहीं सकता और बीच में ही प्रोग्राम छोड़कर चले आयें ये ना हमारी सभ्यता हमें करने देती है और ना ही हमारी आदत है।


बच्चों ने बहुत-बहुत सुन्दर पेंटिग बनायी हुई थी आप लोग तो देखने से वंचित रह गये आप हमें यहाँ बैठे-बैठे हमारे देश हमारे शहर की हमें सैर कराते हैं तो चलिये आज़ हम भी यहाँ नन्हें-मुन्नों की कलाकारी आपको दिखाते हैं ...

यह एक ऐसा समूह है जो रंग भेद बिल्कुल नहीं जानता अगर कुछ जानता है तो वो है प्यार, इनकी नन्हीं-२ मुस्कानों में मैंने खुद को एक बंधन में बंधा हुआ पाया "प्यार के बंधन में" जिसने मुझे प्रोग्राम की समाप्ति तक बांधे रखा ...

सर्वप्रथम कुछ चित्र देखिये जो बच्चों ने बनाये हैं-


मेरी बेटी ऐश्वर्या (उम्र ७ वर्ष) द्वारा बनाया चित्र :





ऐश्रवर्या द्वारा बनाया "ऐलियन मास्क":




ऐश्रवर्या द्वारा बनाया आईस्क्रीम स्टिक का हैट जिस पर पोस्टर कलर से बनाई खोपड़ी और हड्डी :

एक बच्चे द्वारा बनाया गया स्पाइडर मैन जो थर्माफोल से बने टी० वी० के अन्दर दिखाया गया :




कोल्ड ड्रिंक की स्ट्रा से बना घर, पिस्ते के छिलके से बना पेड़ और क्ले से बने फूल क्या शोभा दे रहे हैं:

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इसके बाद नम्बर आया फैशन शो का इसमें काफी बच्चों ने भाग लिया इसकी खासियत ये थी कि फैशन शो में पहने जाने वाले सभी वस्त्र बड़े अनोखे थे देखिये-





ये मोबाईल के रीचार्ज़ कार्ड से बनी ड्रैस हैः




ब्रूम स्टिक से बनी ड्रैस :
आज़ कम्यूटर थोड़ा थका हुआ महसूस कर रहा है घिसट-घिसट कर चल रहा सुबह १० बज़े पोस्ट डालनी शुरू की थी अब शाम के ५ बज़ने वाले हैं पर पोस्ट है की पूरी होने का नाम ही नहीं लेती शायद इतनी पिक्चर डालने से ये बुरा हाल हुआ है, तो अब मुझे चलना चाहिये आज़ वीक एंड हैं घूमने जाना है बहुत लेट हो गयी हूँ अभी भी पोस्ट में ही उलझी रही तो मेरे बच्चे मुझसे नाराज़ होकर सो भी जायेंगे, तो अलविदा फिर मिलेंगे अगर आपको चित्र पंसद आये तो टिपण्णी देना भूलियेगा मत और फिर लौटेंगे और चित्रों के साथ...
भावना कुँअर

7 टिप्‍पणियां:

DR.ANURAG ARYA ने कहा…

सच मे बहुत प्यारी पेंटिंग्स है ,बच्चे कुछ लकीरे भी खीच दे तो उनके पीछे पुरी एक कहानी होती है ...शायद सभी लोग आप की तरह सोचते तो जाने कल उन बच्चो मे कोई ...कलाकार छुपा मिलता ....

abrar ahmad ने कहा…

बडी प्यारी तस्वीरें हैं। बच्चे चाहे हिंदुस्तान में रहें या किसी और देश में उनकी जडें इसी जमीन से जुडी रहती हैं। आपकी बेटी की तस्वीरों में भी वही जडें नजर आ रही है। इसके लिए आपको बधाई।

अतुल ने कहा…

पेंटिंग त्तो सुंदर है पर फ़ांट नही दिख रहा.

mehek ने कहा…

wow nanhe bachho ke chitra bahut sundar hai.

sanjay patel ने कहा…

शब्द शर्मा जाते हैं इन रंग-रेखाओं से.....मासूम हाथों की करिश्माई पेशकश

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

भावना जी बच्चों को आशीष और आपको डबल बधाई कि बच्चों को परदेस में अपने संस्कारों के दरमियां रखना भी तो एक कला है ना
---योगेन्द्र मौदगिल

Manish ने कहा…

बहुत बढिया !! बच्चे की इस खूबी में रूकावट न आये .....चित्र देखकर यही दुआ निकलती है ..