24 मई 2011

वीणा और लोक गंगा में हाइकु



वीणा मासिकश्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य सभा , इन्दौर की  हिन्दी की एक मात्र सबसे पुरानी वह पत्रिका है जो  1927 से अब तक निरन्तर प्रकाशित हो रही है ।इस पत्रिका ने समभाव से हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं और सभी रचनाकारों को समान महत्त्व दिया है । दिसम्बर 2010 के अंक में डॉ भावना कुँअर के 28 हाइकु दिए गए हैं । सम्भवत इतने हाइकु पहली बार दिए हैं।इसी क्रम में लोकगंगा मासिक देहरादून ने भी अपने जनवरी 2011 के अंक मे  डॉ भावना कुँअर के छह हाइकु दिए गए हैं ।  हाइकु जगत में इसे उपलब्धि ही कहा जाएगा । सभी शुभचिन्तकों की ओर से हार्दिक बधाई !                                                                                                                                     रामेश्वर काम्बोज

8 टिप्‍पणियां:

rachana ने कहा…

bahut bahut badhai ho .
aap bahut achchha likhti hain
sada aese hi likhti rahiye
rachana

अमिता कौंडल ने कहा…

भावना जी बहुत सुंदर हाइकु हैं. आपकी इन उपलब्धियों के लिए हार्दिक बधाई.
सादर,
अमिता कौंडल

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

भावना जी को बहुत बहुत बधाई.

अशोक कुमार शुक्ला ने कहा…

आपके लिखे हाइकु पढ़कर अच्छा लगा डा० अशोक कुमार शुक्ला लखनऊ

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बधाईयाँ आपको.

ऐसे ही छपते रहें, लिखते रहें.

सुनील गज्जाणी ने कहा…

bhawana jee
namaksaar !
aap nirantar yuhi hi sahity srijamn karti rahe , ye kamana hai . is uplabdhiyon ke liye bahut bahut badhai ,
saadar

डॉ. हरदीप संधु ने कहा…

एक लेखक के लिए उसकी रचनाएँ उसकी रूह की खुराक होतीं हैं | वह अपनी रचनाओं को जी -जान से प्यार करता है ...दिल में संजोए रखता है | जब उसकी रचनाएँ किसी ऐसी पत्रिका का हिस्सा बनतीं है जिसका नाम देश भर में इतने सम्मान से लिया जाता हो तो उसकी ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहता | ऐसी ही ख़ुशी आज भावना जी के आँगन में नाच रही है और हम तो बिन बुलाए ही इस में शामिल हैं जी !वीणा में आपके हाइकु पढ़कर बहुत अच्छा लगा !
भावना जी ...आपको ढेरों- ढेर बधाई !
मगर भूलना न हमरी मिठाई !
हरदीप

BrijmohanShrivastava ने कहा…

हाइकू पढे। इसके अलावा आपके हाइकू पहले भी अविराम पत्रिका में पढ चुका हूं। उसमें लगभग 12 हाइकू आपके प्रकाशित हुये थे जिसमें से एक शायद आसमान छूने से सम्बंधित भी था और चांद के वारे में भी