16 जुलाई 2018

चोका/नया सवार





मझदार में
एक नाव थी फँसी
सवार आया
देख वो घबराया
नाव को लेके
था किनारे लगाया ।
बना गहरा
मधुर,विलक्षण
प्यारा सा रिश्ता ।
कितने सफ़र थे
संग में किए
वो सपने सारे ही
साकार हुए ।
काँटों की राह चले
पीछे ना हटे ।
छूट गए सारे ही
सगे संबंधी ।
मासूम वो सवार
बड़ा नादान
छल-कपट भरी,
बेदर्द इस
दुनिया से अन्ज़ान ।
बाज़ सा आया
इक नया सवार
उसे कहाँ था
भला इसका ज्ञान।
ले गया नाव
वो दूर देश कहीं
दोनों हैं खुश
तिल-तिल मरता
आँसू है पीता
पर चुप रहता
कभी झील को
मझदार को कभी
यूँ अपलक
निहरता रहता
वो पुराना सवार।


Dr.Bhawna Kunwar

12 टिप्‍पणियां:

Satya sharma ने कहा…

बहुत सुंदर सृजन
बहुत ही उम्दा चोका लिखा है आपने

मंजूषा मन ने कहा…

बहुत सुंदर चोका भावना जी... हार्दिक बधाई

सहज साहित्य ने कहा…

बहुत भावपूर्ण चोका।

नीलाम्बरा.com ने कहा…

डॉ भावना जी, हार्दिक बधाई, सुन्दर सृजन हेतु ।

Satya sharma ने कहा…

बहुत ही उम्दा चोका
एक नदी सी बहती हुई
हार्दिक बधाई

Dr.Bhawna Kunwar ने कहा…

Bahut bahut aabhar kamboj ji.

ज्योति-कलश ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति !

Jyotsana pradeep ने कहा…

बहुत प्यारी तथा भावपूर्ण रचना भावना जी !

Sudershan Ratnakar ने कहा…

बहुत सुंदर, भावपूर्ण चोका

Anita Manda ने कहा…

बहुत सुंदर !

Dr.Bhawna Kunwar ने कहा…

Aap sabhi ki hradya se aabhari hun rachna pasand karne or tippani karne ke liye...bahut bahut aabhar..

Krishna ने कहा…

बहुत सुंदर भावपूर्ण चोका