5 दिसंबर 2007

आप सबके स्नेह की आभारी

हाइकु दिवस के पावन अवसर पर आप सबको हार्दिक बधाई

आज मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मान रही हूँ कि इस इस शुभ अवसर पर मेरी पुस्तक "तारों की चूनर" (हाइकु संग्रह) का विमोचन भारत में किया गया जिसमें प्रसिद्ध हाइकुकार डॉ० जगदीश व्योम जी और पूर्णिमा जी का पूर्ण सहयोग मिला मैं उनकी तहे दिल से आभारी हूँइससे सम्बन्धित जानकारी आप यहाँ चित्र सहित देख सकते हैं...

डॉ० भावना कुँअर

12 टिप्‍पणियां:

उन्मुक्त ने कहा…

बधाई - 'चोंच में आकाश' चिट्ठे पर चित्र सुन्दर है।

अनूप शुक्ल ने कहा…

अरे वाह, बधाई आपको।

mamta ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई।

arbuda ने कहा…

दीदी,मेरी भी शुभकामनाएँ व बधाई स्वीकारें।

अनिल रघुराज ने कहा…

भावना जी, मेरी भी बधाई स्वीकार करें।

Ujjwala & Pankaj ने कहा…

Dear Bhawnaji,
Aapki pustak ke vimochan ki hardik badhaian sweekar karen. Hamen badi prasannata hoti hai jab koi kalaakar apni kala ki abhivyakti karta hai.
Hare Krsna!
Ujjwala & Pankaj

सहज साहित्य ने कहा…

भावना जी हाइकु विमोचन के अवसर पर मेरी हार्दिक बधाई !डा व्योम जी एवं भट्ट जी मेरे अभिन्न मित्रों में हैं ,यह सुख्द संयोग है ।
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

तारों की छाया वह जिसने शब्द चित्र को संजो रखा है
लिये प्रतीक्षा खड़ा हुआ हूँ, जाने कब वह छांह मिलेगी
लेकिन तब तक भेज रहा हूँ मन की हर इक मधुर कामना
आशा है रचनात्मकता की नित्य नई इक कली खिलेगी.

राकेश खंडेलवाल

Lavanyam - Antarman ने कहा…

भावना जी ,
बहुत बहुत बधाई - शीर्षक भी सुन्दर और आपका चित्र भी ;-)

अनूप भार्गव ने कहा…

भावना जी:

इस पुस्तक के विमोचन के लिये बहुत बहुत बधाई ।
अब इसे इटरनेट पर भी ले आइये जिस से हम जैसे दूर बैठे भी उसे पढ सकें ।

तुम्हारा पापा ने कहा…

हुआ विमोचन पुस्तक का जब हुई प्रशंसा यूँ जग में,
सारे कँटक दूर हुये,जो भी थे प्रशस्ति पग में
शत-2प्रणाम उस जननी को जो लाई तुमको दुनिया में
सारा जग ही सिमट गया अपनी छोटी सी"मुनिया" में।
तुम्हारा पापा

Dr.Bhawna ने कहा…

आपके शब्द मुझे उत्साह वृद्धि करते हैं , मुझे लेखन की प्रेरणा देते हैं...आप सबका स्नेह मेरे लिये यूँ ही बना रहे भगवान से यही प्रार्थना है...

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद...