9 दिसंबर 2011

चलिए आज कुछ दर्द की बात हो जाए -"एक साया"


                                                      












अभी भरे भी नहीं थे 
पुराने जख़्म...
कि नयों ने बना लिया रस्ता 
हम सोचकर यही 
छिपाते रहे उनको 
कि सह लेंगे चुपचाप...
रातभर 
सिसकियों को दबाकर 
जख़्मों को 
मरहम लगाने का
उपाय करते रहे
न जाने कब
एक सिसकी 
बाहर तक जा पहुँची
और फिर
जो तूफ़ान आया
उसका अंदाज भी नहीं था
मिट गए सभी जख्म
और बन्द हो गईं सिसकियाँ
सदा के लिए
कभी-कभी एक साया सा
दिखता है कमरे की खिड़की से
पर अन्दर देखो तो
अंधकार के सिवा कुछ नहीं
एक धुँआ उठता है
अमावस की रात में
पर दरवाजा खोलो तो कुछ नहीं
लोग कहते हैं कि
यहाँ भटकती है 
रूह किसी की...
आवाज़ आती है
उसकी कराहट की...
पर अब 
सिसकियाँ नहीं आती ...


Bhawna

17 टिप्‍पणियां:

सहज साहित्य ने कहा…

दर्द की बहुत ही गहन अभिव्यक्ति है । लगता है् जैसे दर्द शरीर धारण करके मानस पटल पर उतर आया हो । झकझोर देने वाली मार्मिक कविता !

Udan Tashtari ने कहा…

गहरा दर्द...मार्मिक....

दर्द उकेर कर रख दिया...

Rakesh Kumar ने कहा…

लोग कहते हैं कि
यहाँ भटकती है
रूह किसी की...
आवाज़ आती है
उसकी कराहट की...
पर अब
सिसकियाँ नहीं आती ...

दर्द को बहुत रहस्यमय ढंग से अभिव्यक्त किया है आपने.सुन्दर मार्मिक प्रस्तुति के लिए आभार.

मेरे ब्लॉग पर आपका इंतजार है,भावना जी.

Deepak Shukla ने कहा…

भावना जी..

कविता में जो दर्द बताया...
हमने भी महसूस किया...
दर्द बिना क्या रहा है कोई...
जिसने न है इसे जिया...

दर्द की इन्तेहा..
दर्द का फसाना...
कविता में दर्द..
दर्द की कविता...

सुंदर भावाभिव्यक्ती...

दीपक शुक्ल...

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

ज़िन्दगी की संवेदना को बड़ी ही खूबसूरती से कविता में पिरोया है !
आभार !

Dr.Nidhi Tandon ने कहा…

दर्द से परिपूर्ण रचना ..मार्मिक!!

Rachana ने कहा…

dard ka itna gahra aur sunder chitran
kamal bahut abhut badhai
rachana

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

गहन अभिव्यक्ति

सागर ने कहा…

darad hi behtreen abhivaykti...

Rajeev Panchhi ने कहा…

वाह ! क्या बात है! बेहद प्रभावशाली रचना!

त्रिवेणी ने कहा…

dard shabd ban kar dil main utar aya .........har shabd main kitna dard.......
Bhawna ji in dard bhare bhavon ko sametkar jo kavita likhi hai ........uske leye aap bdhai ki patar hain .

hardeep

V.P. Singh Rajput ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।
मेरा शौक
मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है
आज रिश्ता सब का पैसे से

प्रेम सरोवर ने कहा…

इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

veerubhai ने कहा…

बेहद उदास करती एक रचना .बेहद उदास करती एक रचना .लाश को धोती एक ज़िन्दगी एक और लाश .

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

bahut sundar abhivykti badhai.

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

Dard kya hota hai eska abhas kavita padh kr hi ho jata hai ... badhai bhawana ji