24 मार्च 2021

“हरियाणा प्रदीप” 24/3/2021 ग़ज़ल

”हरियाणा प्रदीप" अख़बार में आज 24/3/2021 को मेरी ताज़ा ग़ज़ल छपी आप लोग भी पढ़िए..


Dr.Bhawna Kunwar


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#ग़ज़ल_ हिन्दी

 


5 अगस्त 2020

ख़्वाब

देखे थे बड़े-बड़े ख़्वाब

साथ मिलकर कभी...

पूरा करने की बारी आई

तो मुँह छिपाकर चल दिए।


Dr.Bhawna Kunwar

14 जुलाई 2020

चोका

1-नन्हीं-सी परी
नन्हीं सी परी
गुलाब पांखुरी सी
आई जमीं पे
झूम उठा आँगन।
महकी हँसी,
रोशन होने लगा
बुझा सा मन,
भर गई फिर से
सूनी वो गोद
प्यारी सी वो मुस्कान
हरने लगी
मन का सूनापन।
लगने लगा
प्यारा अब जीवन,
फिर से जागीं
सोई वो तमन्नाएँ,
झूमने लगा
नन्हें से हाथों संग
बन मयूर
झुलसा हुआ मन।
दिखने लगीं
दबी संवेदनाएँ,
खिलने लगीं
मेरे भी लबों पर
रंग-बिरंगी
कलियों सी कोमल,
हवा सी नर्म,
पानी जैसी तरल,
रात रानी की
ख़ुशबू से नहाई,
नये छंदों से
सुरों को सजाती सी,
प्यारी-प्यारी लोरियाँ।
Dr.Bhawna Kunwar

10 मई 2020

मातृ दिवस

मातृ दिवस पर माँ को समर्पित ये दो दोहे..❤❤️सभी को मातृ दिवस की शुभकामनाएँ❤❤
❤
ऐसी सबकी सोच हो, दे नारी को मान
यही सृष्टि मैंने रची, सोचेगा भगवान।
❤
वो ही रहें अनन्त तक, मन मंदिर के ईश
मात-पिता के सामने, झुका रहे ये शीश।


















Dr.Bhawna Kunwar