14 अक्तूबर 2021

दोहा/नारी

आज नारी पर ये आख़िरी दोहा प्रेषित कर रही हूँ कोशिश रही कि जब तक नवरात्र चलें एक दोहा पोस्ट करूँ..कल से कुछ ओर..तब तक इसको पढ़िये 😊
काँधे से काँधे मिला, चले पुरुष के साथ।
हो कैसा भी काम ये, खाएँगी ना मात।।
© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

13 अक्तूबर 2021

ताँका पर ऑनलाईन गोष्ठी की चर्चा समाचार पत्रों में -डॉ०भावना कुँअर




























डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

नारी/दोहे

ऐसी सबकी सोच हो, दे नारी को मान।
ऐसे जग में ‘भावना’, उतरेगा भगवान।।
© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

12 अक्तूबर 2021

नारी/दोहे

नारी सागर प्रेम का, होता हृदय विशाल ।
हर मुश्किल के सामने, बन जाती है ढाल।।
© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

11 अक्तूबर 2021

प्रशस्ति पत्र:अध्यक्ष वैश्विक हिन्दी संस्थान/ह्यूस्टन, यू एस ए


ओमप्रकाश गुप्ता जी (अध्यक्ष वैश्विक हिन्दी संस्थान) का आभार प्रशस्ति पत्र के लिए...























डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

दोहे/नारी

मन से चाहे हों भले, नारी कोमल फूल। 
सहनशीलता में मगर, पर्वत के अनुकूल।।
© डॉ० भावना कुँअर
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http://australianchal.com/ 

















 


डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

10 अक्तूबर 2021

नारी/दोहे

बेटी, माँ, पत्नी, बहन, लेती रुप अनूप।
कभी बदरिया जल भरी, कभी गुनगुनी धूप।।
© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

8 अक्तूबर 2021

नारी /दोहा

पायल, कंगन, चूड़ियाँ, दीं हैं सभी उतार।
निकल पड़ी हैं नारियाँ, लिये हाथ तलवार।
© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

नारी /दोहा

नारी आगे बढ़ रही, जैसे चढ़ती धूप
प्यार मिले तो प्रेयसी, वरना दुर्गा रूप।
© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

4 सितंबर 2021

“जनाजा”


न मेंहदी सजी
न डोली उठी
न फेरे ही कर पाए
पर देखो आज …
उठा जो जनाजा मेरा
खामोश पलकों में
तेरी ही तस्वीर
लबों में तेरा नाम
जाने क्यूँ
रह-रह कर आए...


© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर

संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

9 जुलाई 2021

माहिया


1.

दुनिया इक मेला है

पर इस मेले में

हर शख़्स अकेला है


2.

हर शख़्स खिलौना है

इक दिन टूटेगा 

ऊँचा या बौना है


3

डरना क्या पहरों से

मन मजबूत करो

लड़ जाओ लहरों से


4

चहकी अब भोर नहीं

ताल पड़े सूखे

पंछी का शोर नहीं


5

बोलो कब आओगे ?

उखड़ रही साँसें

सूरत दिखलाओगे ?


6.

रिश्तों में दूरी है

टूटे ना ये घर

सहना मजबूरी है


7.

तेरी याद चली आयी

बदली सी बनकर

वो आँख में है छायी 


8.

खुश थे दोनों भाई

किसने खोदी है

उन रिश्तों में खाई


9.

बातें जब करते हो

अमृत के घट तुम 

लगता है भरते हो


10.

काँटे से चुभते हैं

दिल को चीर रहे 

अपने जो रिश्ते हैं


11.

हमसे जब लोग जले

जाना जब हमने

उनसे हम दूर चले


12.

दुनिया ग़म देती है 

पर माँ की ममता 

सब ग़म हर लेती है


13.

आँखें छम-छम बरसें

साथ नहीं साजन

कैसे फिर मन हरसे 


14.

सच हो गये तब सपने

जब रूठे साजन

लौट आये घर अपने


15.

तुम फूल सा खिल जाओ

हर घर-आँगन को

ख़ुशबू सा महकाओ


16.

होता ये क्यूँ जाने

चढ़ते रहते हैं

सूली पे दीवाने


17.

ये साँझ की बेला है

नभ में देखो तो

पंछी का रेला है


18.

मिलने की रुत आई

आँसू की बरखा 

रोके ना रुक पाई


19.

दुःख में भी जी लेंगे

तू जो साथ रहा

संग आँसू पी लेंगे


20.

कैसा ये सपना था

झूठे वादों से

टूटा दिल अपना था


-/-/

© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर

संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका


24 मार्च 2021

5 अगस्त 2020

ख़्वाब

देखे थे बड़े-बड़े ख़्वाब

साथ मिलकर कभी...

पूरा करने की बारी आई

तो मुँह छिपाकर चल दिए।


© डॉ० भावना कुँअर
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14 जुलाई 2020

जापानी कविता-"चोका"


1-
नन्हीं-सी परी
नन्हीं सी परी
गुलाब पांखुरी सी
आई जमीं पे
झूम उठा आँगन।
महकी हँसी,
रोशन होने लगा
बुझा सा मन,
भर गई फिर से
सूनी वो गोद
प्यारी सी वो मुस्कान
हरने लगी
मन का सूनापन।
लगने लगा
प्यारा अब जीवन,
फिर से जागीं
सोई वो तमन्नाएँ,
झूमने लगा
नन्हें से हाथों संग
बन मयूर
झुलसा हुआ मन।
दिखने लगीं
दबी संवेदनाएँ,
खिलने लगीं
मेरे भी लबों पर
रंग-बिरंगी
कलियों सी कोमल,
हवा सी नर्म,
पानी जैसी तरल,
रात रानी की
ख़ुशबू से नहाई,
नये छंदों से
सुरों को सजाती सी,
प्यारी-प्यारी लोरियाँ।

© डॉ० भावना कुँअर
Editor👇