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4 सितंबर 2021

“जनाजा”


न मेंहदी सजी
न डोली उठी
न फेरे ही कर पाए
पर देखो आज …
उठा जो जनाजा मेरा
खामोश पलकों में
तेरी ही तस्वीर
लबों में तेरा नाम
जाने क्यूँ
रह-रह कर आए...


© डॉ० भावना कुँअर
Editor👇

डॉ०भावना कुँअर

संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

5 अगस्त 2020

ख़्वाब

देखे थे बड़े-बड़े ख़्वाब

साथ मिलकर कभी...

पूरा करने की बारी आई

तो मुँह छिपाकर चल दिए।


© डॉ० भावना कुँअर
Editor👇