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11 अक्टूबर 2021

दोहे/नारी

मन से चाहे हों भले, नारी कोमल फूल। 
सहनशीलता में मगर, पर्वत के अनुकूल।।
© डॉ० भावना कुँअर
Editor👇
http://australianchal.com/ 

















 


डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

10 अक्टूबर 2021

नारी/दोहे

बेटी, माँ, पत्नी, बहन, लेती रुप अनूप।
कभी बदरिया जल भरी, कभी गुनगुनी धूप।।
© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

8 अक्टूबर 2021

नारी /दोहा

पायल, कंगन, चूड़ियाँ, दीं हैं सभी उतार।
निकल पड़ी हैं नारियाँ, लिये हाथ तलवार।
© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

नारी /दोहा

नारी आगे बढ़ रही, जैसे चढ़ती धूप
प्यार मिले तो प्रेयसी, वरना दुर्गा रूप।
© डॉ० भावना कुँअर
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डॉ०भावना कुँअर 
संपादिका-ऑस्ट्रेलियांचल ई-पत्रिका

10 मई 2020

मातृ दिवस /दोहे

मातृ दिवस पर माँ को समर्पित ये दो दोहे..❤❤️सभी को मातृ दिवस की शुभकामनाएँ❤❤
❤
ऐसी सबकी सोच हो, दे नारी को मान
यही सृष्टि मैंने रची, सोचेगा भगवान।
❤
वो ही रहें अनन्त तक, मन मंदिर के ईश
मात-पिता के सामने, झुका रहे ये शीश।

© डॉ० भावना कुँअर
Editor👇
















© डॉ० भावना कुँअर
Editor👇