25 अक्तूबर 2006

मेरी अम्मा के गाँव में



मुझे आज फिर मेरी अम्मा याद आईं हैं।

छूकर हवा जब मुझको है लौटी

याद आई है मुझे अम्मा की रोटी।

नहीं भूल पायी हूँ आज भी-

उस रोटी की सौंधी-सौधीं खुशबू को

मिल बैठकर खाने के-

उस प्यारे से अपनेपन को

साँझ ढलते ही-

नीम के पेड की छांव में-

अपनी अम्मा के-

सुहाने से उस गाँव में-

चौकडी लगाकर सबका ही बैठ जाना

फिर दादा संग किस्से कहानियाँ सुनना, सुनाना।

नहीं भूली मैं खेत - खलिहानों को

उन कच्चे - पक्के आमों को।

जब अम्मा याद आती है-

तब आँखें भर-भर जाती हैं।

खोजती हूँ उनको-

खेतों में खलिहानों में

उस नीम की छाँव में

उन कहानियों में, उन गानों में

पर अम्मा नहीं दिखती

बस दिखती परछाई है।

न जाने ऊपर वाले ने

ये कैसी रीत चलाई है

हर बार ही किसी अपने से

देता हमें जुदाई है

और इस दिल के घरौंदें में

बस यादें ही बसाई हैं

मुझे आज फिर मेरी अम्मा याद आईं हैं

मुझे आज फिर मेरी अम्मा याद आईं हैं।

डॉ० भावना कुँअर

13 टिप्‍पणियां:

sue vijh ने कहा…

Amma to sanjhi hain- aap ki kavita dil ko choone vali hai- sue

sue vijh

Dr.Bhawna ने कहा…

Sue ji
Shukriya mere man ke bhav aap tak pauchen.
Dr.Bhawna

प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह ने कहा…

अम्‍मा जी तथा उनके गांव के प्रति आपने अच्‍छा लिखा है।

NARENDER PUROHIT ने कहा…

bhawna ji
aapki dono poems bahut aachi lagi, dur desh mei rahe kar aapne apni sanskiriti ko nahi bhuli aur usee ko apne sabo rupi motio ki mala me pirokar kavita ka roop de diya, hume apne bachpan ke dino ki yaad bahut aati hei, hamare vo sunere pal shayad kabhi vapas aaye, lakin aapki kavita padhkar unko yaad to kar hi sakte hei, vo gaav me bite din vo gaav ke galiya, vo haath se bani balls, vo pakdm pakdi ka khel, vo ristedar, vo kahaniya, sab yaad aata hei.

डॉ० भावना ने कहा…

sue ji,प्रमेन्द्र जी, नरेन्द्र जी बचपन तो है ही ऐसा की बस याद किया जा सकता है लौटाया नहीं जा सकता। बहुत - बहुत शुक्रिया।

डॉ० भावना

Kiran Puri ने कहा…

"Meri Umma Ke Gaon Mein" Great thought..very emotional.. really liked it.

Dr.Bhawna ने कहा…

किरन जी आपको रचना पसन्द आई, आपने इसके भावों को आंका। बहुत-बहुत धन्यवाद।

सुनीता शानू ने कहा…

आज फ़िर खेली है हमने लिंक्स के साथ छुपमछुपाई चर्चा में आज नई पुरानी हलचल

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अम्मा को याद करते हुए गहन भावों को पिरोया है ..
बहुत सुन्दर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ..

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बेहतरीन।

सादर

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

achchha laga aapko amma ko yaad karna...wo bhi kaviton ke shabdo me:)

abhaar!

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

kabhi hamare blog pe tashreef layen...

www.jindagikeerahen.blogspot.com

Dorothy ने कहा…

दिल को छूने वाली मर्मस्पर्शी प्रस्तुति. आभार.
सादर,
डोरोथी.